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विकास से कोसों दूर है एक गांव बनकटा दुबे, काग़ज़ों में ओडिएफ है,हकीकत में कुछ और
June 26, 2020 • डॉ पंकज कुमार सोनी • बस्ती मंडल

बस्ती । विकासखंड कप्तानगंज की सभी ग्राम पंचायतों को ओडीएफ करने की होड़ लगी हुई है और कागजों में लगभग पूरा भी कर लिया गया है किंतु धरातल की स्थिति कुछ और बयां कर रही है जिसका पुख्ता सबूत ग्राम पंचायत सरैया मिश्र के राजस्व ग्राम बनकटा दुबे के रहने वाले मनोज कुमार पुत्र राम मूर्त हैं, जो पूरी तरह से आवास विहीन और भूमिहीन हैं। किसी तरह से दीवार खड़ी कर टीन टप्पर से बने घर में जीवन यापन कर रहे हैं।     

उक्त मनोज ने बताया कि प्रधान से लेकर ब्लॉक स्तर तक शौचालय एवं आवास के लिए गुहार लगा चुके हैं, फिर भी विकासखंड कप्तानगंज के आला अफसर या तो मनोज कुमार की बात को समझ नहीं पा रहे हैं अथवा ग्राम प्रधान सरैया मिश्र उन्हें आवास और शौचालय का लाभ देना नहीं चाह रहे हैं ऐसे में कहीं ना कहीं प्रतीत होता है कि मनोज कुमार भेदभाव पूर्ण रवैया के शिकार हो रहे हैं। 

इसका एक प्रमुख कारण यह भी प्रतीत होता है कि विकासखंड कप्तानगंज के संयुक्त विकास खंड अधिकारी कप्तानगंज विकासखंड के सुधि ना के बराबर लेते हैं जिसके कारण यहां पर गिने चुने प्रधान सरैया मिश्र जैसी स्थिति उत्पन्न करने की कोशिश कर रहे हैं। बीडीओ कप्तानगंज से बात की गई जिसमें उन्होंने बताया कि आप जांच हेतु प्रार्थना पत्र विकासखंड को दीजिए तो जांच संभव है जांच का इतना बड़ा पिटारा विकासखंड कप्तानगंज के सामने है फिर भी आला अधिकारी कार्रवाई करने से पीछे हट रहे हैं। ऐसे में कहीं ना कहीं मिलीभगत की आशंका प्रतीत हो रही है मनोज कुमार ने बताया कि मैं प्रधान के घर तक भी गया और ग्राम प्रधान ने मुझे कहा कि तुम जाओ मैं तुम्हें शौचालय का लाभ नहीं दे सकता ऐसे में यह बेसहारा व्यक्ति जो दिनभर ठेला चला कर अपने परिवार का जीवन यापन करता है वह किस-किस दरवाजे को खटखटाएगा या विकासखंड कप्तानगंज एवं प्रशासन के सामने एक सबसे बड़ी चुनौती भरा प्रश्न है इतना ही नहीं इसी ग्राम पंचायत के गांव बनकटा दुबे में लोगों को गांव से निकलने का रास्ता नहीं है जैसे प्रधान जी पिछले लगभग 5 सालों से रास्ते को जलमग्न देख रहे हैं फिर भी उस पर उन्होंने एक रोड़ी मिट्टी तक नहीं डलवाया जिससे लगभग पूरे साल भर लोगों का आना-जाना दुर्लभ बना रहता है पूरे रास्ते पर लगभग फिर से 25 सेंटीमीटर पानी सदा भरा रहता है ऐसे में पूरे विकासखंड में विकास का ढिंढोरा पीट कर तालाब तालाबों का सुंदरीकरण 5 साल में दो दो बार कराया जा रहा है जबकि जलमग्न रास्ते को आंखों से भी नहीं देखा जा रहा है। यदि शीघ्र तत्काल रास्ते का मरम्मत कराया जाए वरना इस गांव के लोग बुरी बुरी बीमारियों से ग्रसित हो सकते हैं । यहां बीमारियों के फैलने की प्रबल आशंका बनी हुई है इसका आंकलन करने के लिए किसी कोई भी आला अफसर इस गांव की दस्तक नहीं दिया।