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तेरी आंख का आंसू देख हैरान हो गया मैं -- कवि तारकेश्वर मिश्र जिज्ञासु
July 26, 2020 • डॉ पंकज कुमार सोनी • हास्य व्यंग/साहित्य

हमें तुमसे मोहब्बत है कितनी कैसे बताऊं ! 

तेरी आंख का आंसू देख हैरान हो गया मैं !! 

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ग़म और ख़ुशी का इजहार करो या ना करो मुझसे ! 

तुम्हारे दिल का हाल तुम्हारे आंसुओं से पढ़ सकता हूं !! 

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कभी अपने आशियाने से निकल मेरी हवेली में भी आओ ! 

ज़िंदगी का सारा किस्सा मेरी आंख के आंसू बता देंगे तुमको !! 

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तुम्हारे दिल के बाज़ार में मेरे आंसुओं की कीमत नहीं है कुछ भी ! 

मगर इतना समझ लो मेरे गम के आंसू में डूबे तो फिर निकल ना पाओगे !! 

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मेरे दर्द का किस्सा सुनाते फिर रहे हो सरे बाज़ार तुम ! 

शायद मेरा दर्द खरीदना चाहो तो कंगाल हो जाओ तुम !! 

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हमारी आंख के आंसू बहुत कुछ बता देंगे तुमको ! 

तुम्हारी काबिलियत हमें कितना पहचान पाते हो !! 

************* तारकेश्वर मिश्र जिज्ञासु कवि व मंच संचालक अंबेडकरनगर उत्तर प्रदेश !