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शोधार्थियों ने किया दावा,इस दवा से रोना वायरस जुकाम में बदल जाता है फिर महज 5 दिन में ठीक हो जाता है
July 15, 2020 • डॉ पंकज कुमार सोनी • अंतरराष्ट्रीय

शोधकर्ताओं ने दावा किया कि इस दिशा में महज पांच दिन तक किए गए उपचार से Coronavirus लगभग पूरी तरह गायब हो गया.

यरूशलम: कोरोना वायरस (Coronavirus) से बचाव के लिए अब दुनियाभर डॉक्टर मौजूदा उपलब्ध दवाओं से ही इलाज कर रहे हैं. इस बीच इजरायल के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि मौजूदा एक दवा से कोरोना वायरस को सामान्य जुकाम में बदला जा सकता है. सबसे अच्छी बात ये हैं कि इस दवा की कीमत बेहद कम है. ये दवा हमारे पास के मेडिसीन स्टोर में भी आसानी से मिलती है.

कोलेस्ट्रॉल की दवा है कोरोना की काट

हिब्रू विश्वविद्यालय के एक शोधकर्ता ने दावा किया है कि बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाली कोलेस्ट्रॉल रोधी दवा ‘फेनोफाइब्रेट’ (fenofibrate) कोरोना वायरस संक्रमण को सामान्य जुकाम में बदल सकता है. यह दावा संक्रमित मानव कोशिका पर दवा के इस्तेमाल के बाद किया गया. विश्वविद्यालय के ग्रास सेंटर ऑफ बायोइंजीनियरिंग में निदेशक प्रोफेसर याकोव नाहमियास ने न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई मेडिकल सेंटर में बेंजामिन टेनोएवर के साथ संयुक्त शोध में पाया कि नोवेल कोरोना वायरस इसलिए खतरनाक है क्योंकि इसके कारण फेफड़ों में वसा का जमाव हो जाता है, जिसे दूर करने में फेनोफाइब्रेट मददगार है.

विश्वविद्यालय की ओर से जारी बयान कहा गया, 'हम जिस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं यदि उसकी पुष्टि नैदानिक शोधों में भी होती है तो इस उपचार से कोविड-19 का जोखिम कम हो जाएगा और यह सामान्य जुकाम की तरह हो जाएगा. दोनों शोधकर्ताओं ने देखा कि सार्स-सीओवी-2 स्वयं को बढ़ाने के लिए मरीजों के फेफड़ों में किस तरह से बदलाव करता है. उन्होंने पाया कि वायरस कार्बोहाइड्रेट को जलने से रोकता है जिसके परिणामस्वरूप फेफड़ों की कोशिकाओं में वसा का जमाव हो जाता है और यही परिस्थिति वायरस के बढ़ने के लिए अनुकूल होती है.

उन्होंने कहा, 'इसीलिए मधुमेह और उच्च कोलेस्ट्रॉल से पीड़ित लोगों के कोविड-19 की चपेट में आने की आशंका अधिक होती है.' फेनोफाइब्रेट फेफड़ों की कोशिकाओं को वसा जलाने में मदद करती है और इस तरह इन कोशिकाओं पर वायरस की पकड़ कमजोर हो जाती है.

शोधकर्ताओं ने दावा किया कि इस दिशा में महज पांच दिन तक किए गए उपचार से वायरस लगभग पूरी तरह गायब हो गया.

विश्वविद्यालय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोरोना वायरस से बचाव के लिए टीका विकसित करने के कई प्रयास चल रहे हैं लेकिन शोध बताते हैं कि टीके से मरीज का इस संक्रमण से बचाव महज कुछ महीनों के लिए ही होता है. इसलिए कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में वायरस के हमले से बचाने से कहीं अधिक आवश्यक वायरस को बढ़ने से रोकना है.