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कभी-कभी दूसरों का भी दर्द समझा करो तुम -- कवि तारकेश्वर मिश्र जिज्ञासु
September 11, 2020 • डॉ पंकज कुमार सोनी • हास्य व्यंग/साहित्य

शहर - ए - वफ़ा का ज़िक्र मत करो मुझसे ! 

शहर की हर एक रिवायत से वाक़िफ़ हूं !! 

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अब तो बहुत थक गया हूं मैं दिन भर घूमते घूमते ! 

क्या कुछ दिनों तक मुझको सुकून मिलेगा तुमसे !! 

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मैं तुम्हारे नाम का ज़िक्र करते फिर रहा हूं सारे शहर में ! 

लोग खूबियां पूछ रहे हैं मुझसे क्या-क्या बताऊं उनको !! 

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इस जीवन में हमें क्या हासिल हो पाएगा कुछ ठीक नहीं !

ज़माने की हवा इन दिनों कुछ अजीबोगरीब सी लगती है !! 

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अपने दिल का हाल तुम्हें भला कैसे बताऊं मैं ! 

कभी-कभी दूसरों का भी दर्द समझा करो तुम !! 

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तुम्हारे शहर की हर एक लड़की बड़े से प्यार से देखती है मुझको ! 

राखी के त्योहार में कलाई पर राखी बंधवा भाई बन गया सबका !! 

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कदम दो कदम चल कर इधर-उधर देखने की आदत अच्छी नहीं ! 

नवाबों के खूबसूरत शहर में यह आदत तुम्हारी जान ले लेगी!! 

************* तारकेश्वर मिश्र जिज्ञासु कवि व मंच संचालक अंबेडकरनगर उत्तर प्रदेश !