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ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) की ग्यारहवीं कड़ी में मुंबई के शायर हीरालाल ने अपने कलाम से श्रोताओं का मन मोहा,खुलकर लोगों ने हौसला अफजाई की
August 16, 2020 • डॉ पंकज कुमार सोनी • हास्य व्यंग/साहित्य

साहित्य:: वर्तमान कोरोना काल में जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में काफी विसंगति आ चुकी है, ऐसा लगता है कि ज़िंदगी ठहर सी गयी है! साहित्य का क्षेत्र भी इससे दुष्प्रभाव से अछूता नहीं बचा है और विभिन्न भाषाओं के साहित्य-प्रेमियों और साहित्यकारों द्वारा वर्ष भर चलाये जाने वाले कवि सम्मेलनों, मुशायरों, सम्मान समारोहों समेत हर प्रकार के आयोजनों पर रोक लग गयी है। लेकिन कहते हैं न कि मनुष्य की अदम्य जीजिविषा उसे हर परिस्थिति का अनुकूलन करने में सक्षम बना देती है, सो हम सबने इस भीषण अवसाद की घड़ी में भी ज़िंदगी को ज़िंदादिली से जीने के लिये नये-नये रास्तों की तलाश कर ली है। ज़िंदगी की इसी खोज़ का परिणाम है नवीन संचार माध्यमों का सहारा लेकर हम अपने-अपने घरों में क़ैद होते हुये भी वेबीनार या साहित्य समारोहों को आयोजित कर रहे हैं। इसीलिए हम देख पा रहे हैं कि पिछले कुछ महीनों से साहित्यिक-साँस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के निमित्त फेसबुक लाइव एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है। फेसबुक लाइव के माध्यम से हम अपने पसंदीदा कवियों-शायर से रूबरू होकर उनकी रचनाओं का रसास्वादन कर रहे हैं ।

इसी क्रम में साहित्य-संस्कृति के संवर्धन में लगी हुई ऐतिहासिक संस्था "पंकज-गोष्ठी न्यास (पंजीकृत)" भी निरंतर क्रियाशील है। "पंकज-गोष्ठी न्यास (पंजीकृत)" के तत्वावधान में चलने वाली प्रख्यात साहित्यिक संस्था "गजलों की महफ़िल (दिल्ली)" भी लगातार आनलाइन मुशायरों एवं लाइव कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है।

"पंकज गोष्ठी न्यास (पंजीकृत)" के अध्यक्ष डाॅ विश्वनाथ झा ने हमारे संवाददाता को बताया कि "न्यास " की ओर से हम भारत के बहुत से शहरों में साहित्यिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित करते हैं। उसी क्रम में ग़ज़लों की महफिल (दिल्ली) की ओर से आयोजित लाइव @ ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) में शायरों के अलावा ग़ज़ल गायकों को भी सप्ताह में एक दिन आमंत्रित करने का निर्णय लिया गया ताकि पटल के शायरों की ग़ज़लों को स्वर बद्ध कर करके ग़ज़ल प्रेमियों को तक पहुँचाया जा सके, साथ ही साथ नामचीन ग़ज़लों को भी सुना सके। 

इसी लिए 15 अगस्त 2020 से प्रख्यात संस्था ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) अपने लाइव कार्यक्रम श्रृंखला के दूसरे चरण में प्रवेश कर गयी। इसी क्रम में कल स्वाधीनता दिवस की संध्या में ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) के पटल को अगर अपनी बेमिसाल ग़ज़ल ग़ज़ल गायकी से पंडित दयानंद परिहस्त जी ने गुलज़ार किया था तो वहीं आज 16 अगस्त 2020, रविवार की शाम 4 बजे से महफ़िल में अपनी बेहतरीन ग़ज़लें पढ़कर मुंबई के लोकप्रिय शायर श्री हीरा लाल यादव जी ने सबका दिल जीत लिया।

ठीक 4 बजे हीरालाल जी पटल पर उपस्थित हो गए और एक से बढ़कर एक बेहतरीन ग़ज़लें सुनाते रहे। जब उन्होंने अपनी ग़ज़ल:

न दुआ में है, न दवा में है जो सुकून तेरी रज़ा में है।

कभी बख़्श उसको ज़मीं ख़ुदा, जो यकीन मेरा हवा में है।

अपनी कशिश भरी आवाज़ में सुनायी तो सभी के मुँह से अनायास ही वाह वाह निकलने लगा।

फिर तो यादव जी ने कई ग़ज़लें सुनायी जिनमें:

हमेशा ज़िन्दगी से क्यों गिला शिकवा रखा जाए।

ख़ुद अपनी ख़्वाहिशों का क़द न क्यों छोटा रखा जाए।

या

इल्तिज़ा ये आपसे करतार है, कुछ कीजिए।

आजकल हर आदमी लाचार है, कुछ कीजिए।

जैसी ग़ज़लें पढी तो दर्शक-श्रोता भाव विभोर हो गये।

फिर यादव जी ने जब

न जाती कभी राजनीती में दुनिया

अगर इसमें मोटी कमाई न होती।

सुनाया तो उनकी इस ग़ज़ल का जादू सर चढ़कर बोलने लगा।

इसी क्रम में उन्होंने जब पुनः

चार पैसे जो बच्चे कमाने लगे।

आँख माता-पिता को दिखाने लगे।

जैसी ग़ज़ल पढ़ी तो मानो हीरालाल जी का सबकी ज़ुबान पर चढ़ गये।

कार्यक्रम के में उन्होंने जब ये पंक्तियाँ पढी

माँगती हैं तुम्हारी जानिब से

अपने हिस्से की ज़िन्दगी आँखें।

 तो मानो सभी झूमने लगे।

सच कहें तो बिलकुल सरल शब्दों में कही गयी हीरालाल यादव जी की ग़ज़लों से महफ़िल वातावरण बेहद रसमय हो गया और बार-बार पेज पर तालियों की बौछार होती रही तथा कैसे एक घंटा बीत गया पता ही नहीं चला। मंत्रमुग्ध होकर हम सभी हीरालाल जी को सुनते रहे, पर दिल है कि भरा नहीं।

 इस तरह अपनी सहज-सरल ग़ज़लें सुनाकर हीरालाल जी ने सभी श्रोताओं का दिल जीत लिया, यानी कि महफ़िल लूट ली।

हीरालाल यादव जी के फ़ेसबुक लाइव देखने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें 

https://www.facebook.com/groups/1108654495985480/permalink/1472524896265103/

   लाइव@ ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) के नाम से चर्चित फेसबुक के इस लाइव कार्यक्रम की विशेषता यह है कि कार्यक्रम शुरू होने से पहले से ही, शाम 4 बजे से ही श्रोता पेज पर जुटने लगते हैं और कार्यक्रम की समाप्ति तक मौज़ूद रहते हैं। इस बार भी ऐसा ही हुआ, महफ़िल की ग्यारहवीं कड़ी के रूप में हीरालाल जी जब तक अपना कलाम सुनाते रहे, रसिक दर्शक और श्रोतेगण महफ़िल में जमे रहे।

पंकज गोष्ठी न्यास द्वारा आयोजित लाइव @ ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) के इस कार्यक्रम का समापन टीम लाइव @ ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) की ओर से डाॅ अमर पंकज जी के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

कार्यक्रम के संयोजक और ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) के एडमिन डाॅ अमर पंकज ने लाइव प्रस्तुति करने वाले शायर आदरणीय हीरालाल यादव जी के साथ साथ दर्शकों-श्रोताओं के प्रति भी आभार प्रकट किया और प्रार्थना की कि महफ़िल के हर कार्यक्रम में ऐसे ही जुड़कर टीम लाइव @ ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) का उत्साहवर्धन करते रहें।

डाॅ अमर पंकज ने टीम लाइव @ ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) के सभी साथियों, डाॅ दिव्या जैन जी , डाॅ यास्मीन मूमल जी, श्रीमती रेणु त्रिवेदी मिश्रा जी, श्री अनिल कुमार शर्मा 'चिंतित' जी, श्री पंकज त्यागी 'असीम' जी और डाॅ पंकज कुमार सोनी जी के प्रति भी अपना आभार प्रकट करते हुए उन्हें इस सफल आयोजन-श्रृंखला की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ प्रेषित की।