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ग़ज़लों की महफ़िल(दिल्ली) की 25 वी कड़ी में झारखंड संगीत कला रत्न चंदन चटर्जी ने ग़ज़ल गायकी के विविध रंगों से श्रोताओ को सरोबार किया,लोगों ने भरपूर दाद देकर हौसला अफजाई की
September 26, 2020 • डॉ पंकज कुमार सोनी • हास्य व्यंग/साहित्य

साहित्य:: वर्तमान कोरोना काल में जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में काफी विसंगति आ चुकी है, ऐसा लगता है कि ज़िंदगी ठहर सी गयी है! साहित्य का क्षेत्र भी इसके दुष्प्रभावों से अछूता नहीं बचा है। विभिन्न भाषाओं के साहित्य-प्रेमियों और साहित्यकारों द्वारा वर्ष भर चलाये जाने वाले कवि सम्मेलनों, मुशायरों, सम्मान समारोहों समेत हर प्रकार के आयोजनों पर रोक लग गयी है। लेकिन कहते हैं न कि मनुष्य की अदम्य जीजिविषा उसे हर परिस्थिति का अनुकूलन करने में सक्षम बना देती है, सो हम सबने इस भीषण अवसाद की घड़ी में भी ज़िंदगी को ज़िंदादिली से जीने के लिये नये-नये रास्तों की तलाश कर ली है। ज़िंदगी की इसी खोज़ का परिणाम है कि नवीन संचार माध्यमों का सहारा लेकर हम अपने-अपने घरों में क़ैद होते हुये भी वेबीनार या साहित्य-समारोहों का आयोजन कर रहे हैं। इसीलिए हम देख पा रहे हैं कि पिछले कुछ महीनों से साहित्यिक-साँस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के निमित्त फेसबुक लाइव एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है। फेसबुक लाइव के माध्यम से हम अपने पसंदीदा कवियों-शायरों से रूबरू होकर उनकी रचनाओं का रसास्वादन कर रहे हैं ।

इसी क्रम में साहित्य और संस्कृति के संवर्धन में लगी हुई ऐतिहासिक संस्था "पंकज-गोष्ठी" भी निरंतर क्रियाशील है। "पंकज-गोष्ठी न्यास (पंजीकृत)" के तत्वावधान में चलने वाली प्रख्यात साहित्यिक संस्था "गजलों की महफ़िल (दिल्ली)" भी लगातार आॅनलाइन मुशायरों एवं लाइव कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है।

"पंकज-गोष्ठी न्यास (पंजीकृत)" के अध्यक्ष डाॅ विश्वनाथ झा ने हमारे संवाददाता को बताया कि "न्यास" की ओर से हम भारत के विभिन्न शहरों में साहित्यिक और साँस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करते हैं। 

डाॅ झा ने जानकारी देते हुए ये भक बताया कि  "ग़ज़लों की महफिल (दिल्ली)" की ओर से आयोजित "लाइव @ ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली)" में शायरों के अलावा ग़ज़ल गायकों को भी सप्ताह में एक दिन आमंत्रित करने के लिये गये निर्णय को सफलतापूर्वक लागू किया जा रहा है ताकि पटल के शायरों की ग़ज़लों को भी स्वर बद्ध करके ग़ज़ल प्रेमियों तक पहुँचाया जा सके, साथ ही साथ नामचीन ग़ज़लकारों की ग़ज़लों को भी सुना जा सके।

ग़ज़ल गायकी के इस कार्यक्रम की शुरुआत 15 अगस्त 2020 से करते हुए यह प्रख्यात संस्था, "ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली)", अपने लाइव कार्यक्रम श्रृंखला के दूसरे चरण में प्रवेश कर गयी थी। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए इस लाइव कार्यक्रम श्रृंखला का तीसरा चरण 13 सितंबर 2020, रविवार, से शुरु हुआ जिसके तहत झारखंड के देवघर जिले के प्रख्यात गायक चंदन चटर्जी जी ने ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) की ग़ज़ल-गायकी के कारवाँ को आगे बढ़ाते हुए लाइव @ ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) की 25 वीं प्रस्तुति दी।

ज्ञातव्य है कि ग़ज़ल-गायकी के क्षेत्र में श्री चंदन चैटर्जी बेहद ख्यातिलबध युवा व्यक्तित्व का नाम है। मूलतः देवघर, झारखंड, से आने वाले श्री चंदन चैटर्जी सुगम संगीत के क्षेत्र की जानी-मानी हस्ती हैं। वे न सिर्फ़ ऑल इंडिया रेडियो, राँची से सम्प्रति सुगम संगीत के B High कलाकार के रूप में संबद्ध हैं, बल्कि देश भर के विभिन्न शहरों में वे अपनी अद्भुत गायकी की प्रस्तुति भी कर चुके हैं।

                    अनोखी गायकी और अद्भुत प्रतिभा के धनी श्री चंदन चैटर्जी को संगीत महोत्सव कोलकाता" (2008) में विशिष्ट प्रतिभा के बल पर "स्वर्ण पदक विजेता" बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।एव "गुरु पूर्णिमा महोत्सव" के अवसर पर पटना में भी उन्हें "संगीत-कला रत्न"(2015) की उपाधि से विभूषित किया गया।

 श्री चंदन चटर्जी जी जैसे प्रख्यात गायक के लाइव आने से मानो महफ़िल में ग़ज़ल-गायकी की गरिमा शिखर पर पहुँच गयी। अतः निःसंदेह कहा जा सकता है कि महफ़िल की आज की शाम को आदरणीय चंदन चटर्जी जी ने बुलंदी पर पहुँचा दिया।

आदरणीय चंदन चटर्जी जी ठीक 4:00 बजे शाम पटल पर उपस्थित हो गए और तबसे लगभग देढ़ घंटे तक अपनी मधुर आवाज़ में एक से बढ़कर एक ग़ज़लों को सुनाकर उन्होंने दर्शकों- श्रोताओं का दिल जीत लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत उन्होंने शाइर ख्वाज़ा परवेज़ की लिखी और मेहदी हसन की गायी

प्यार भरे दो शर्मीले नैन

जिनसे मिला मेरे दिल को चैन

कोई जाने ना, क्यूं मुझसे शर्माए

कैसे मुझे तड़पाए

इस ग़ज़ल से की। इस ग़ज़ल पर उन्होंने ख़ूब तालियाँ बटोरीं।

इसके बाद जब उन्होंने क़तील शिफ़ाई की लिखी और मेहदी हसन की गायी:

भरे जहाँ में कोई मेरा यार था ही नहीं

किसी नज़र को मेरा इंतज़ार था ही नहीं

 ये ग़ज़ल गायी तो माहौल रसमय हो गया।

 इस ग़ज़ल के बाद चंदन चटर्जी जी ने अज़ीम शाइर असरार अंसारी की ग़ज़ल:

कच्ची दीवार हूँ ठोकर न लगाना मुझको

अपनी नज़र में बसा कर न गिराना मुझको

गायी। इसको गाते ही तो मानो सभी कोई चंदन चटर्जी जी की गायकी के कायल हो गए।

फिर इन्होंने जब ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) के प्रसिद्ध और उस्ताद शायर श्री शरद तैलंग साहेब की ग़ज़ल:

अपनी बातों में असर पैदा कर

तू समंदर सा जिगर पैदा कर

गायी तो मानो इनकी गायी ग़ज़लों को सुनकर महफ़िल में शामिल सभी दर्शक-श्रोता दिल थामकर बैठ गये।

इसके बाद चंदन चटर्जी जी ने साबिर जलालाबादी की ये ग़ज़ल:

राज़ की बातें लिखी और ख़त खुला रहने दिया

जाने क्यूँ रुसवाईयों का सिलसिला रहने दिया

 गायी। इस पर भी उन्हें ख़ूब वाहवाही मिली। कार्यक्रम आगे बढता गया और लोग झूमते रहे।

फिर चंदन जी ने मुम्बई से जुड़े हुए एक श्रोता की फ़रमाइश पर जब इब्राहिम अश्क की लिखी और चंदन दास की गायी

खुदा का ज़िक्र करे या तुम्हारी बात करे

हमें तो इश्क़ से मतलब किसी की बात करे

चंदन चटर्जी जी की गायकी का कमाल था कि उपस्थित सभी उस्ताद शायर वाह वाह करने लगे। महफ़िल का वातावरण पूरी तरह से गीतमय हो गया।

इसके बाद पुनः ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) से जुड़े हुए दूसरे प्रसिद्ध और उस्ताद शायर डाॅ कृष्ण कुमार नाज़ साहेब की ये ग़ज़ल:

अहसास की शिद्दत ही सिमट जाय तो अच्छा

ये रात भी आँखों ही में कट जाय तो अच्छा

 जब गायी तो सभी वाह वाह करने लगे।

उसके बाद फिर चंदन जी ने नश्क़ ल्यालपुरी की लिखी और लता मंगेशकर की गायी ये ग़ज़ल गायी:

रस्म-ए-उल्फ़त को निभाएँ तो निभाएँ कैसे

हर तरफ़ आग है दामन को बचाएँ कैसे

इसके बाद तो सभी दर्शक-श्रोता अचंभित रह गये।

ग़ज़ल-गायकी के इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का समापन चंदन चटर्जी जी ने ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) के संचालक व एडमिन तथा समकालीन चर्चित ग़ज़लगो डाॅ अमर पंकज की इस ग़ज़ल से की बेहतरीन प्रस्तुति से किया:

कड़ा पहरा है मुझपर तो सँभलकर देखता हूँ मैं,

बदन की क़ैद से बाहर निकलकर देखता हूँ मैं

डाॅ अमर पंकज जी की इस ग़ज़ल को अपने अद्भुत अंदाज़ में, अपनी गायकी में डूबकर जब चंदन चटर्जी जी ने गाया तो उपस्थित दर्शक-श्रोता भी मानो उनकी अद्भुत गायकी में डूब से गये। वाह वाह की झड़ी लग गयी और कैसे समय बीत गया , पता ही नहीं चला।

मंत्रमुग्ध होकर हम सभी चंदन चटर्जीजी को सुनते रहे, पर दिल है कि भरा नहीं।

चंदन चटर्जी जी की गायकी की एक ख़ास खूबी ये रही कि तबले की संगत पर साथ देने वाले तबला वादक श्री सुरोजीत के साथ में उम्दा ग़ज़लें गाकर उन्होंने न सिर्फ़ सबको बाँधे रखा बल्कि अपनी दर्द भरी आवाज़ से सबका दिल जीत लिया।

मशहूर शायरों की ग़ज़लों को अपनी बेहतरीन धुन देकर जब इन्होंने गाया तो मानो ग़ज़ल का कथ्य मूर्त रूप लेकर सबकी आँखों में तैरने लगा। यह चंदन चटर्जी जी की गायकी का कमाल था।

इस तरह कहा जा सकता है कि मशहूर और साधक गायक चंदन चटर्जी जी ने आज के लाइव@ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) के कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया। वास्तव में इन्होंने श्रोताओं का दिल जीत लिया, यानी कि महफ़िल लूट ली।

श्री चंदन चटर्जी जी के इस कार्यक्रम को फ़ेसबुक पर लाइव देखने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें 

https://www.facebook.com/chandan.chatterjee.5686/videos/1828252933980721/

   लाइव@ ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) के नाम से चर्चित फेसबुक के इस लाइव कार्यक्रम की विशेषता यह है कि कार्यक्रम शुरू होने से पहले से ही, शाम 4 बजे से ही श्रोता पेज पर जुटने लगते हैं और कार्यक्रम की समाप्ति तक मौज़ूद रहते हैं। इस बार भी ऐसा ही हुआ, महफ़िल की 25 वीं कड़ी के रूप में चंदन चटर्जी जी जब तक ग़ज़लें सुनाते रहे, रसिक दर्शक और श्रोतेगण महफ़िल में भाव विभोर होकर डूबे रहे।

पंकज गोष्ठी न्यास द्वारा आयोजित लाइव @ ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) के इस कार्यक्रम का समापन टीम लाइव @ ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) की ओर से डाॅ अमर पंकज जी के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ

कार्यक्रम के संयोजक और ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) के एडमिन डाॅ अमर पंकज ने लाइव प्रस्तुति करने वाले गायक आदरणीय चंदन चटर्जी जी के साथ साथ दर्शकों-श्रोताओं के प्रति भी आभार प्रकट किया और सबों से अनुरोध किया कि महफ़िल के हर कार्यक्रम में ऐसे ही जुड़कर टीम लाइव @ ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) का उत्साहवर्धन करते रहें।

डाॅ अमर पंकज ने टीम लाइव @ ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) के सभी साथियों, डाॅ दिव्या जैन जी , डाॅ यास्मीन मूमल जी, श्रीमती रेणु त्रिवेदी मिश्रा जी, श्री अनिल कुमार शर्मा 'चिंतित' जी, श्री पंकज त्यागी 'असीम' जी और डाॅ पंकज कुमार सोनी जी के प्रति भी अपना आभार प्रकट करते हुए उन्हें इस सफल आयोजन-श्रृंखला की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ प्रेषित की।