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गजलों की महफ़िल(दिल्ली)की 29 वी कड़ी में बिहार के प्रख्यात ग़ज़ल गायक राजीव कुमार सिंह ने नामचीन शायरों की गजलें सुनाकर श्रोताओं के मन को मोहा,लोगो ने जमकर उठाया लुत्फ़,
October 11, 2020 • डॉ पंकज कुमार सोनी • हास्य व्यंग/साहित्य

साहित्य:: वर्तमान कोरोना काल में जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में काफी विसंगति आ चुकी है, ऐसा लगता है कि ज़िंदगी ठहर सी गयी है! साहित्य का क्षेत्र भी इसके दुष्प्रभावों से अछूता नहीं बचा है। विभिन्न भाषाओं के साहित्य-प्रेमियों और साहित्यकारों द्वारा वर्ष भर चलाये जाने वाले कवि सम्मेलनों, मुशायरों, सम्मान समारोहों समेत हर प्रकार के आयोजनों पर रोक लग गयी है। लेकिन कहते हैं न कि मनुष्य की अदम्य जीजिविषा उसे हर परिस्थिति का अनुकूलन करने में सक्षम बना देती है, सो हम सबने इस भीषण अवसाद की घड़ी में भी ज़िंदगी को ज़िंदादिली से जीने के लिये नये-नये रास्तों की तलाश कर ली है। ज़िंदगी की इसी खोज़ का परिणाम है कि नवीन संचार माध्यमों का सहारा लेकर हम अपने-अपने घरों में क़ैद होते हुये भी वेबीनार या साहित्य-समारोहों का आयोजन कर रहे हैं। इसीलिए हम देख पा रहे हैं कि पिछले कुछ महीनों से साहित्यिक-साँस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के निमित्त फेसबुक लाइव एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है। फेसबुक लाइव के माध्यम से हम अपने पसंदीदा कवियों-शायरों से रूबरू होकर उनकी रचनाओं का रसास्वादन कर रहे हैं ।

इसी क्रम में साहित्य और संस्कृति के संवर्धन में लगी हुई ऐतिहासिक संस्था "पंकज-गोष्ठी" भी निरंतर क्रियाशील है। "पंकज-गोष्ठी न्यास (पंजीकृत)" के तत्वावधान में चलने वाली प्रख्यात साहित्यिक संस्था "गजलों की महफ़िल (दिल्ली)" भी 13 जुलाई 2020 से लगातार आनलाइन मुशायरों एवं लाइव कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है।

"पंकज-गोष्ठी न्यास (पंजीकृत)" के अध्यक्ष डाॅ विश्वनाथ झा ने हमारे संवाददाता को बताया कि "न्यास" की ओर से हम भारत के विभिन्न शहरों में साहित्यिक और साँस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करते रहे हैं, परंतु करोना-काल अब ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन संभव नहीं है। अतः फिलहाल हम आनलाइन कार्यक्रमों की मार्फ़त ही अपनी सामाजिक-साँस्कृतिक जिम्मेदारी का निर्वाह कर रहे हैं और इसी क्रम में "ग़ज़लों की महफिल (दिल्ली)" की ओर से आयोजित "लाइव @ ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली)" में शायरों के अलावा ग़ज़ल गायकों को भी सप्ताह में एक दिन आमंत्रित किया जा रहा है, ताकि पटल से जुड़े हुए कुछ नामचीन शायरों शायरों की ग़ज़लों को स्वर बद्ध कर करके ग़ज़ल प्रेमियों तक पहुँचाया जा सके, साथ ही साथ नामचीन ग़ज़लकारों की ग़ज़लों को भी सुना सके। 

फ़िलहाल ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली)", की लाइव कार्यक्रम श्रृंखला का तीसरा चरण चल रहा है। इस तीसरे चरण के कार्यक्रम में लाइव @ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) की 29 वीं प्रस्तुति के रूप में आज, शनिवार, 10 अक्टूबर 2020, शाम 4 बजे से भागलपुर (बिहार) के चर्चित गायक-कलाकार आदरणीय राजीव कुमार सिंह जी ने अपनी बेहद ख़ूबसूरत और मधुर आवाज़ में ग़ज़लें सुनाकर आज की शाम को एक यादगार शाम बना दिया। बेमिसाल स्वर, सुर और अंदाज़ में गायी गयी उनकी ग़ज़लों ने तो जादू ही कर दिया और सबको लगभग देढ़ घंटे से अधिक समय तक बाँधे रखा रखा।

लगभग 4:10 बजे आदरणीय राजीव कुमार सिंह जी पटल पर उपस्थित हो गए और तबसे लेकर देढ़ घंटे तक वे अपनी बेहतरीन ग़ज़लें सुनाते रहे और उनकी गायकी का लुत्फ़ लेते हुए महफ़िल में लोग झूमते रहे।

श्री राजीव कुमार सिंह जी की गायकी ने ऐसा प्रभाव छोड़ा मानो सभी कोई गायक की ही भावनाओ में जैसे खो गए।श्री राजीव कुमार सिंह जी का व्यक्तित्व जितना सुदर्शन है उतनी ही मधुर है उनकी गायकी।

सरल और सहज परंतु बेहद ख़ेबसूरत व्यक्तित्व के धनी श्री राजीव कुमार सिंह की गायकी के दीवाने हजारों की संख्या में हैं, जिसकी गवाही रोज शाम को प्रसारित होने वाली इनकी सम्मोहक गायकी देती है। लाइव कार्यक्रमों में जहाँ 20-25 लोगों की एक साथ उपस्थित भी किसी कलाकार की बड़ी उपलब्धि मानी जाती है वहीं श्री राजीव कुमार के साथ उनके लाइव कार्यक्रम में देर रात तक प्रायः 100 से अधिक चाहने वाले जुड़े होते हैं और अपनी पसंदीदा ग़ज़लों को गाने की फरमाइशें करते रहते हैं।गायकी इनकी साधना भी है और इनका पूर्ण कालिक पेशा भी।बिहार और झारखंड में भजन, लोकगीत और ग़ज़ल गायकी के क्षेत्र का एक बहुत बड़ा नाम है श्री राजीव कुमार सिंह।

      सच कहें तो आदरणीय श्री राजीव कुमार सिंह जी द्वारा गायी गयी नायाब ग़ज़लों से महफ़िल का वातावरण बेहद जीवंत हो गया और बार-बार पेज पर तालियों की बौछार होती रही तथा कैसे देढ़ घंटे का समय बीत गया, पता ही नहीं चला। मंत्रमुग्ध होकर हम सभी उन्हें जी भर के सुनते रहे, पर दिल है कि भरा नहीं। 

इस तरह कहा जा सकता है कि अपनी बेहतरीन आवाज़ और अंदाज़ में जनाब मेंहदी हसन, गुलाम अली, जगजीत सिंह द्वारा गाई ग़ज़लें के साथ कई नामचीन शायरों की गजलें सुनाकर राजीव जी ने सभी श्रोताओं का दिल जीत लिया, यानी कि महफ़िल लूट ली।आप भी निम्न लिंक पर क्लिक करके उनके द्वारा गाई गजलों का आनंद ले सकते है।

आदरणीयश्री राजीव कुमार सिंह जी के फ़ेसबुक लाइव देखने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें 

https://www.facebook.com/groups/1108654495985480/permalink/1520688521448740/

   लाइव@ ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) के नाम से चर्चित फेसबुक के इस लाइव कार्यक्रम की विशेषता यह है कि कार्यक्रम शुरू होने से पहले से ही, शाम 4 बजे से ही दर्शक-श्रोता पेज पर जुटने लगते हैं और कार्यक्रम की समाप्ति तक मौज़ूद रहते हैं। इस बार भी ऐसा ही हुआ, महफ़िल की 29 वीं कड़ी के रूप में आदरणीय श्री राजीव कुमार सिंह जी जब तक अपना कलाम सुनाते रहे, रसिक दर्शक और श्रोतागण महफ़िल में जमे रहे।

"पंकज-गोष्ठी न्यास (पंजीकृत) द्वारा आयोजित "लाइव @ ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली)" के इस कार्यक्रम का समापन टीम लाइव @ ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) की ओर से डाॅ अमर पंकज जी के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

कार्यक्रम के संयोजक और ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) के एडमिन डाॅ अमर पंकज ने लाइव प्रस्तुति करने वाले अप्रतिम गायक आदरणीय श्री राजीव कुमार सिंह जी के साथ-साथ दर्शकों-श्रोताओं के प्रति भी आभार प्रकट करते हुए सबों से अनुरोध किया कि महफ़िल के हर कार्यक्रम में ऐसे ही जुड़कर टीम लाइव @ ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) का उत्साहवर्धन करते रहें।

डाॅ अमर पंकज ने टीम लाइव @ ग़ज़लों की महफ़िल (दिल्ली) के सभी साथियों; डाॅ दिव्या जैन जी , डाॅ यास्मीन मूमल जी, श्रीमती रेणु त्रिवेदी मिश्रा जी, श्री अनिल कुमार शर्मा 'चिंतित' जी, श्री पंकज त्यागी 'असीम' जी और डाॅ पंकज कुमार सोनी जी के प्रति भी अपना आभार प्रकट करते हुए उन्हें इस सफल आयोजन-श्रृंखला की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ प्रेषित की।