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दिल की आवाज़ सुनती आ रही है लेखनी मेरी -- कवि तारकेश्वर मिश्र जिज्ञासु
July 7, 2020 • डॉ पंकज कुमार सोनी • हास्य व्यंग/साहित्य

हमें ज़रूरत नहीं किसी अस्त्र और शस्त्र की !! 

मेरी लेखनी की धार बहुत ही तेज है प्यारे !!

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मैं अपनी लेखनी से कभी कोई सौदा नहीं करता ! 

दिल की आवाज़ सुनती आ रही है लेखनी मेरी !!

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मेरी लेखनी ने ही मुझको इस मुकाम पर पहुंचाया है ! 

शहर के बड़े सेठ साहूकार इज़्ज़त से नाम लेते हैं !! 

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ब्लड प्रेशर और शुगर की बीमारी से अब तक बचे हुए हैं हम ! 

लेखनी से अपने दिल की आवाज़ बाहर निकाल देता हूं प्यारे !! 

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ऐसे लोगों के ज़मीर और जज़्बात का ज़िक्र मैं क्या करूं ! 

जो अपनी लेखनी को गिरवी रख देते हैं मुंह मांगी रकम पाकर !!

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लेखनी का किरदार कुछ इस तरह फैला है दुनिया में ! 

तकनीकी दुनिया में भी किताबों से रिश्ता कायम है !! 

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लेखनी की पूजा करता आ रहा हूं बचपन से ! 

मेरी पूजा फलित हुई है इसमें कोई शक नहीं !! 

************* तारकेश्वर मिश्र जिज्ञासु कवि व मंच संचालक अंबेडकरनगर उत्तर प्रदेश !